उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सहकारी सहयोगी दल सहकार भारती ने आगामी सहकारी निकाय चुनाव लडेंने की घोषणा की है। बीते सोमवार (10 जुलाई) को संगठन ने यह घोषणा की। संगठन के चुनाव लड़के के फैसले को लेकर राष्ट्रीय सचिव विजय देवांगन ने काफी बातें कही और कई मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा, “हमारी कोशिश है कि सहकारी निकायों में पारदर्शिता लाई जाए। इसी लिए हमने चुनाव लड़ने का यह फैसला लिया है। बैठक में हमने तय किया है कि राज्य में पदाधिकारियों द्वारा निकाय चुनाव के लिए लोगों के नाम तय किए जाएंगे।” सहकारी निकायों के लिए चुनाव अगले साल (2018) की शुरुआत में होने की उम्मीद है। देवांगन ने और भी कई मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि संगठन की मांग है कि राज्य में स्टेट कॉपरेटिव बोर्ड की स्थापना की जाए।

देवांगन ने कहा, “बीजेपी को संविधान का 97वां प्रावधान पूरी तरह से लागू करना चाहिए ताकी निकायों को ज्यादा सवतंत्र और पारदर्शी बनाया जा सके। सहकार भारती की मांग है कि कृषि, डेरी, पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्रों में सहकारी निकायों को ब्याजरहित लोन मिले जिससे कि लोगों कि मदद की जा सके।” देवांगन ने यह भी कहा कि सहकारी बैंकों की स्थिति अच्छी नहीं है और हमारा संगठन जिला सहकारी बैंकों और एपेक्स सहकारी बैंकों के विलय की वकालत करता है।

संगठन ने पीपीपी मॉडल के तहत दिए जाने वाले ठेकों में भी सहकारी बैंकों को तरजीह देने की बात कही है। वहीं सहकार भारती ने राज्य में बीजेपी की योगी आदित्य नाथ सरकार के सामने और भी कई मांगे रखी हैं। संगठन की मांग है कि बीते कुछ सालों में निकायों में हुई लगभग 1000 पदों की भर्तियों की जांच एसआईटी से कराई जाए।

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