उत्तर प्रदेश की योगी आदित्य नाथ सरकार पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार के दिए गए कई ठेकों की “विस्तृत विशेष ऑडिट” (खाता-बही की जांच) कराएगी। इस ऑडिट के तहत, लागत बढ़ा-चढ़ा कर दिखाने, ठेके देने में नियमों का उल्लंघन, जरूरी मंजूरी न लेने और एक पार्क में सांप पकड़ने के लिए नौ करोड़ रुपये देने की जांच विशेष तौर पर की जाएगी। भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी की सरकार की तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में हुई कथित धांधली की शिकायतों के बाद ये फैसला लिया है। सूत्रों के अनुसार सरकारी ऑडिट में कुछ विशेष आरोपों की खास तौर पर जांच की जाएगी। मसलन, जनेश्वर मिश्रा पार्क परियोजना में 20-20 लाख रुपये की नावें खरीदना, 14 करोड़ रुपये घास लगाने और भूविकास पर और पार्क में सांप पकड़ने के लिए नौ करोड़ खर्च करना।

अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने जनेश्वर मिश्रा पार्क और जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेएनआईपीसी) के निर्माण में आई लागत, पुराने लखनऊ के हुसैनाबाद इलाके के विस्तार के खर्च की “विस्तृत ऑडिट” के आदेश दे दिए हैं। इन तीनों परियोजनाओं का काम सीधे अखिलेश यादव की निगरानी में हुआ था। मुख्यमंत्री रहने के दौरान अखिलेश के पास हाउजिंग विभाग था जिसके तहत ये तीनों काम थे।

मार्च 2017 में योगी आदित्य नाथ ने सीएम पद की शपथ ली। दो महीने बाद मई में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर अनिल गर्ग ने इन तीनों परियोजनाओं की जांच के लिए तीन अलग-अलग कमेटियां बनाईं। हर कमेटी में लोक निर्माण विभाग के एक चीफ इंजीनियर, एक सुपरिटेंडिंग इंजीनियर और दो एग्जिक्यूटिव इंजीनियर और अन्य सदस्य हैं। इन कमेटियों ने अपने रिपोर्ट में पिछले हफ्ते “विशेष ऑडिट” की अनुशंसा की थी।

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