योग गुरु सुरक्षित गोस्वामी के अनुसार, चंद्रभेदी प्राणायाम गर्मियों के दिनों में किया जाना चाहिए। यह प्राणायाम शरीर में ठंडक बढ़ाता है। इससे मौसम की गर्मी का असर शरीर पर कम पड़ता है। पित्त रोगों में आराम मिलता है। पेट की गर्मी, खट्टी डकारें व मुंह के छाले दूर होते हैं। रक्त शुद्ध होता है और त्वचा के रोगों में लाभकारी है। उच्च रक्तचाप, चिड़चिड़ेपन, अनिद्रा व तनाव को दूर करने वाला है यह प्राणायाम। यह मन को शांत कर सिर की गर्मी को भी दूर करता है।

सावधानी: दमा, कफ रोग, लो ब्लडप्रेशर व ठंड के दिनों में इसका अभ्यास न करें।

चन्द्र्भेदी प्राणायाम को करने की विधि :-

पहली स्थिति :- सबसे पहले किसी समतल व् शांत जगह पर दरी या चटाई , आसन बिछाकर उस पर सुखासन की अवस्था में बैठ जाएँ ।

दूसरी स्थिति :-अब अब अपनी गर्दन मेरुदंड और कमर को सीधा करें ध्यान रहें की वो मुड़ें ना एक दम आपको सावधान अवस्था में बैठना है |

तीसरी स्थिति :- अब अपने बायें हाथ(उल्टा हाथ) को अपने बायें वाले घुटने पर रखें। और दायें हाथ(सीधा हाथ) के उंगूठे से दांय नाक के छेद को बंद कर दें अथार्त अंगूठे को नाक के छिद्र पर रख दें |

चौथी स्थिति :- अब अपनी बायीं नाक के छिद्र से लंबी और गहरी सांस को धीरे धीरे भरें और अपने हाथ की अंगुलियों से बायें नाक के छेद को भी बंद कर दें।

पांचवी स्थिति :- अब आपको यहाँ पर कुंभक करना है अथार्त  जितना हो सके अपनी स्वास को अंदर ही रोकना है |

छटवी स्थिति :- अब बाद में दाहिने नथुने से श्वास को धीरे-धीरे छोड़ दें।

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