ज्योति सिंह

एक बार किसी व्यक्ति ने संत सुकरात से पूछा श्रीमान चंद्रमा में कलंक और दीपक तले अंधेरा क्यों रहता है? संत सुकरात ने मुस्कराते हुए पूछा हे भद्र! पुरुष यह बताओ कि तुम्हें चन्द्रमा की ज्योति और दीपक का प्रकाश क्यों नहीं दिखाई देता. वह व्यक्ति विचार करने लगा। अंत में उसे इस प्रश्न का उत्तर मिल गया कि मनुष्य प्रत्येक वस्तु को दो दृष्टि से देखता है। जो व्यक्ति अच्छे होते है वे प्रत्येक वस्तु में अच्छाई को ही देखते हैं परन्तु जो व्यक्ति बुरे होते है वे प्रत्येक वस्तु की बुराईयों को ही देखते हैं। उन्हें अन्दर छिपी अच्छाइयाँ स्पष्ट नहीं दिखाई देती। इतना सुनते ही वह व्यक्ति प्रसन्नता पूर्वक संत के चरणों मे गिर पड़ा और बोला आज मेरे मन का सारा मैल दुर होगया। मैं     हमेशा सच्चाई और अच्छाईयों को ही ढूँढ़ने का प्रयास करूँगा।

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