ददुआ की मौत के बाद पिछले दो साल से खामोश रहा बीहड़ फिर डकैतों के आतंक से अशांत हो उठा है।  डकैत ललुआ ने तीन ग्रामीणों को जंगल में ले जाकर जिंदा फूंक दिया। बाकी ग्रामीणों ने भागकर जान बचाई। ललुआ को शक था कि ग्रामीण पुलिस के लिए मुखबिरी करते थे। जिसके बाद उसने पहले उन्हें बंधक बनाया और फिर सबके सामने आग में झोंक दिया। इस घटना से शासन-प्रशासन में हड़कंप मचा है। वहीं एक बार फिर से डकैतों का खौफ चित्रकूट के ग्रामीणों के सिर पर चढ़कर बोल रहा है।

जंगल में मौका मुआयना के लिए पहुंचे बांदा के डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी कहते हैं कि, ”हो सकता है कि इन्हें कहीं और मारा गया हो और यहां लाकर एक साथ जला दिया गया हो. अब इसके बारे में पूरी तहकीकात की जा रही है. जो भी यहां एविडेंस मिले उनको कलेक्ट किया गया है. स्कल कलेक्ट किया गया है. डीएनए सैंपलिंग कराई जाएगी और जो लोग गायब हैं उनके परिवार वालों के डीएनए परीक्षण कराए जाएंगे. फिर उससे कनेक्ट किया जाएगा

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