बीसीसीएल में  2009-2011 के बीच कुस्तौर एरिया में फर्जी बिल भुगतान घोटाले में फंसे सात कोयला अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। इन अफसरों ने करीब 100 करोड़ की गड़बड़ी की थी। बीसीसीएल प्रबंधन को इस कार्रवाई से संबंधित कोल इंडिया की चिट्ठी मिली है। बर्खास्त अफसरों में तत्कालीन एरिया जीएम समेत एसपी सिंह, पीपी गुप्ता जैसे कई बड़े अधिकारियों के नाम कथित रूप से शामिल बताए जा रहे हैं।

क्या है मामलाः कुस्तौर एरिया में काम हुआ ही नहीं और कई अधिकारियों ने ठेका कंपनी को सौ करोड़ से ज्यादा का बिल भुगतान कर दिया था। इसी मामले में एक बैंक खाते की जांच हुई और सौ करोड़ से ऊपर का खुलासा हुआ था। सीबीआई विजिलेंस एवं आयकर अपने-अपने स्तर से मामले की जांच की। जांच एजेंसी ने संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की थी। विजिलेंस की अनुशंसा पर 18 लोगों पर पेनाल्टी लगायी गयी थी।

ठेका कंपनी को मिला लाभः कुस्तौर प्रबंधन ने बिना काम कराए बिल भुगतान किया था, जिसका सीधा लाभ ठेका कंपनी को मिला। पीसीसी रोड, आवास व छत मरम्मत का काम जमीन पर नहीं कागज पर हुआ। मालूम हो कि सीबीआई व विजिलेंस ने यहां करीब 2900 फाइलें जब्त की थीं, जिनमें 1900 फाइलें अनपेड बिल से संबंधित थीं। कई मामले कैपिटल फंड के दुरुपयोग से भी संबंधित है।

सीबीआई की जांच में भी कई वरीय अधिकारियों का नाम सामने आया था। प्रमोद गुप्ता, ज्योतिषी चंद्रा जीएम माइनिंग, सुरेश सिंह जीएम प्रोडक्शन, ए सेनगुप्ता जीएम, संदीप बंधोपाध्याय, संजय ठाकुर वरीय प्रबंधक वित्त, विनय ठाकुर असैनिक अभियंता, अशोक साह उप प्रबंधक वित्त, देवकमल घोष वरीय प्रबंधन वित्त, विमल प्रसाद असैनिक अभियंता, विजय ठाकुर चीफ मैनेजर असैनिक, रमेश प्रताप सिंह प्रबंधक असैनिक, चौबे प्रसाद शर्मा मुख्य प्रबंधक असैनिक, उमाशंकर कंधवे मुख्य प्रबंध वित्त समेत  कई कर्मचारियों के खिलाफ भी जांच हुई थी। जांच एजेंसी को कई अधिकारियों पर संदेह है कि उन्होंने उच्च पद पर रहते हुए ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया। अपनी गर्दन फंसते देख कुस्तौर एरिया का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया था।

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