आगरा: बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने 2007 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के साथ ही एसपी के कुछ नेताओं के खिलाफ कड़े कदम उठाए थे। एसपी विधायक हरिओम यादव और उनके बेटे विजय प्रताप पर लगे गंभीर आरोपों की जांच के लिए पुलिस को ताकीद की थी। इन दोनों पर चल रहे केस के दस्तावेज 2009 में तैयार हुए थे। दोनों पर 7 केस दर्ज किए गए थे।

अखिलेश यादव की सरकार बनने के एक साल बाद 2013 में रहस्यमय तरीके से शिकोहाबाद पुलिस स्टेशन में दोनों के केस से संबंधित दस्तावेज जलकर राख हो गए। आरोप है कि जिस वक्त आग लगी थाने में कई सीनियर पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। आग लगने की घटना के बाद से ही रेकॉर्ड गायब हैं। अब योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद उस वक्त मौजूद अधिकारियों को दस्तावेजों के जलने के संबंध में नोटिस जारी किया है। सभी अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि यह बहुत आश्चयर्यजनक है कि किसी पुलिस स्टेशन में इस तरह आग लग जाए और महत्वपूर्ण केस की फाइलें जलकर राख हो जाएं। वहीं, दूसरी तरफ सिरसागंज से एसपी के विधायक हरिओम यादव कहते हैं कि उन पर लगाए गए सभी आरोप राजनीतिक षड्यंत्र हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे पुलिस रेकॉर्ड कब और कैसे जले, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।’

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